श्री दिव्यनाथ धाम की अपनी यात्रा की योजना कैसे बनाएँ
श्री दिव्यनाथ धाम की आध्यात्मिक यात्रा की योजना बनाना एक सुखद और शांतिपूर्ण अनुभव हो सकता है। एक शांत स्थान […]
श्री दिव्यनाथ धाम हरिद्वार एवं कुरुक्षेत्र के मध्य स्थित है जो आदिकाल से परमात्मा की मूल स्थली है श्री दिव्यनाथ धाम हरिद्वार से करीब 120 किलो मीटर एवं कुरुक्षेत्र से लगभग 80 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश व हरियाणा की सीमा पर स्थित पतित पावनी माँ यमुना के दिव्य तट राजघाट झरौली सहारनपुर पर स्थित है। जहां पर परमात्मा स्वयं पालनहार के रूप में विद्यमान रहते हैं यहां परमात्मा श्री विष्णु के रूप में मौजूद हैं जो संसार के पालन कर्ता कहे जाते हैं इस भूमि पर परमात्मा अपने सर्वोच्च रूप एवं सर्वोच्च वरदान देने वाली शक्ति के रूप में मौजूद रहते हैं परमात्मा ने वरदान स्वरुप पतित पावनी मां यमुना को भी जीवन दायनी स्वरूप देते हुए इसी जगह पर राजघाट नाम से स्थान दिया है!
श्री दिव्यनाथ धाम जगत का पालन करने वाले भगवान विष्णु का मूल स्थान है पौराणिक धार्मिक ग्रंथो और पुराणों में इसे बैकुंठ के नाम से भी जाना गया है (ऋग्वेद-1.154.1 एवं 3) की व्याख्या में आचार्य सायण ‘विष्णु’ का अर्थ व्यापनशील (देव) तथा सर्वव्यापक बताते हैं अर्थात वह परमात्मा जो सर्वत्र व्याप्त है और सर्व शक्तियों से संपन्न है जिसे निर्गुण भाव के लोग भी निराकार रूप में इस संसार को नियंत्रित करने वाली सर्वोच्च शक्ति के रूप में मानते हैं सृष्टि निर्माण से पूर्व से ही आदि देव त्रिदेव का यह मूल स्थान रहा है सृष्टि की रचना ब्रह्मा जी ने इस स्थान से शुरू की थी तथा सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु इसी स्थान पर अब भी मूल रूप में निवास करते है आज भी आत्मा, परमात्मा के मिलन का सुखद योग यहां देखा जा सकता है और महसूस किया जा सकता है |
एक प्रभुजी का प्रतिदिन का जिसमें हम उपचार, भोजन (नाश्ता-दोपहर का भोजन-जलपान-रात्रिभोज)
वस्त्र, देखभाल, आश्रय और जीवन की अन्य आवश्यक वस्तुएँ निम्नलिखित रूप में प्रदान करते हैं-
श्री दिव्यनाथ धाम की आध्यात्मिक यात्रा की योजना बनाना एक सुखद और शांतिपूर्ण अनुभव हो सकता है। एक शांत स्थान […]
शोरगुल और निरंतर गति से भरी दुनिया में, श्री दिव्य नाथ धाम शांति, भक्ति और दिव्य ऊर्जा का एक पवित्र […]